Amalaki Ekadashi Vrat Katha 2026 in Hindi: इस दिन है आमलकी एकादशी, पढ़ें व्रत कथा और महत्व

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Amalaki Ekadashi Vrat Katha 2026 in Hindi

जय श्री कृष्णा 🙏
आज के इस ब्लॉग Amalaki Ekadashi Vrat Katha 2026 in Hindi में हम एक ऐसी दिव्य कथा (Divine Story) को विस्तार से जानेंगे, जिसमें एक शिकारी ने इस पावन कथा का श्रवण (Listening) करके ही राजपद प्राप्त कर लिया था। दोस्तों, इस कथा का श्रवण आमलकी एकादशी के दिन करना अत्यंत शुभ और मंगलकारी (Auspicious) माना जाता है। आपको बता दें कि इस एकादशी को रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) भी कहा जाता है

इस लेख में कथा के साथ आप जानेंगे कि साल 2026 में आमलकी एकादशी कब है, इसका शुभ मुहूर्त क्या है यदि आप भी श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा एक साथ पाना चाहते हैं, तो इस कथा को अंत तक जरूर पढ़ें।

आमलकी एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Detailed Timings)

आमलकी एकादशी व्रत 2026 कब है?
दोस्तों, साल 2026 में आमलकी एकादशी का पावन व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा, जिसकी तिथि इसी दिन रात 12:33 AM से शुरू होकर रात 10:32 PM तक रहेगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त (Auspicious timing) सुबह 06:48 AM से 11:08 AM तक रहेगा।

आमलकी एकादशी 2026 में व्रत का पारण समय क्या है?
व्रत का पारण (Vrat Parana) अगले दिन 28 फरवरी, शनिवार को द्वादशी तिथि में सुबह 06:47 AM से 09:06 AM के बीच करना अत्यंत फलदायी होगा। इस विशेष दिन पर आंवले के वृक्ष (Amla Tree) की पूजा और भगवान विष्णु की आराधना का शास्त्रों में बहुत महत्व बताया गया है।

आमलकी एकादशी व्रत कथा महत्व( Amalaki Ekadashi Vrat Katha Mahatva )

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, Amalaki Ekadashi का व्रत पूरी श्रद्धा और नियम के साथ करने से सभी पापों का नाश होता है। इस दिन आंवले के वृक्ष (Amla Tree) के नीचे भगवान विष्णु की उपासना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि (Prosperity) आती है, जो आत्मशुद्धि (Self-purification) कराकर जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

साथ ही, इस एकादशी की एक और बेहद खास महिमा है मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना (Gouna) कराकर पहली बार काशी आए थे जहाँ उनका भव्य स्वागत रंगों और गुलाल से हुआ था, इसीलिए इसे रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) भी कहा जाता है। यह पावन व्रत हमें सच्ची भक्ति और सदाचार (Virtue) के मार्ग पर चलने की अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा (Spiritual Energy) देता है।

आमलकी एकादशी व्रत कथा

(कथा आरंभ)

राजा चित्ररथ का पूरा विवरण

प्राचीन काल की बात है, वैदिश नाम का एक नगर था जहाँ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चारों वर्ण के लोग बहुत ही आनंदपूर्वक रहते थे। उस नगर में हमेशा वेदों की ध्वनि गूंजती रहती थी और कोई भी व्यक्ति पापी या नास्तिक नहीं था। उस नगर के राजा का नाम चित्ररथ (King Chitraratha) था। राजा चित्ररथ बहुत ही विद्वान और धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उनके राज्य में कोई भी व्यक्ति गरीब नहीं था और सभी अपने-अपने वर्णो के हिसाब से अपना-अपना कर्म करते थे। राजा और उनकी प्रजा दोनों ही भगवान विष्णु के परम भक्त थे और हर महीने आने वाली दोनों एकादशियों का नियमपूर्वक पालन करते थे।

एकादशी का दिन और पूजन

एक बार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी का दिन आया। राजा और उनकी प्रजा ने सुबह नदी में स्नान किया और मंदिर में जाकर भगवान विष्णु की पूजा की। सभी लोग मंदिर में स्थित आंवले के वृक्ष के पास एकत्र हुए। राजा ने उस वृक्ष के निचे स्थित भगवान विष्णु को धूप, दीप, नैवेद्य और फूलों से सजाया और उनकी स्तुति की।

सभी लोग रात भर जागरण कर रहे थे और भगवान के भजनों में मग्न थे। उसी समय एक बहुत ही भूखा और प्यासा शिकारी (Hunter) वहां आया जो स्वभाव से बहुत ही पापी और दुराचारी था। वह भोजन की तलाश में भटक रहा था लेकिन जब उसने देखा कि इतने सारे लोग एकत्र होकर पूजा कर रहे हैं, तो वह कौतूहलवश (out of curiosity) एक कोने में छिपकर बैठ गया।

शिकारी का हुआ उद्धार

वह शिकारी रात भर भूखा-प्यासा वहीं बैठा रहा और लोगों के साथ भगवान विष्णु की कथा और भजन सुनता रहा। वैसे उसका उद्देश्य पूजा करना नहीं था, लेकिन अनजाने में ही उसने आमलकी एकादशी का व्रत और रात्रि जागरण कर लिया।
अगले दिन सुबह होते ही सभी लोग अपने-अपने घर चले गए और वह शिकारी भी अपने घर जाकर भोजन करने लगा। इस प्रकार उसका व्रत का पारण भी हो गया लेकिन कुछ समय बाद उस शिकारी की मृत्यु हो गई।

भगवान विष्णु की कृपा: पुनर्जन्म की अद्भुत घटना

दोस्तों, अनजाने में किए गए उस व्रत का प्रभाव इतना शक्तिशाली था कि उस शिकारी का अगला जन्म एक बहुत बड़े राजा राजा विदूरथ के यहाँ हुआ और उसका नाम वसुरथ (King Vasurath) रखा गया। राजा वसुरथ बहुत ही प्रतापी, वीर और धार्मिक स्वभाव के थे। उनके पास अपार धन-संपत्ति और विशाल सेना थी। एक बार राजा वसुरथ शिकार खेलते हुए जंगल में रास्ता भटक गए। और थक हार कर वे एक पेड़ के नीचे बैठ गए। उसी समय वहां से कुछ डाकू (Bandits) गुजरे। उन्होंने देखा कि यह वही राजा है जिसने उनके साथियों को दंड दिया था। डाकुओं ने राजा पर हमला करने की योजना बनाई।

वे राजा पर अस्त्र-शस्त्र चलाने लगे, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा (Divine Grace) और आमलकी एकादशी के प्रभाव से वे शस्त्र राजा के शरीर को छूते ही फूलों के समान कोमलता में बदल जाते। और कुछ समय बाद राजा मुर्च्छित हो गए। तभी अचानक राजा के शरीर से एक अत्यंत दिव्य और सुंदर देवी प्रकट हुईं।

देवी द्वारा दुष्टों का संहार

उस देवी ने देखते ही देखते उन सभी दुष्ट डाकुओं का संहार(destruction) कर दिया। जब राजा की नींद खुली, तो उन्होंने देखा कि उनके चारों ओर डाकुओं के शव पड़े हैं। राजा अचंभित हो गए और सोचने लगे कि इस निर्जन वन में उनकी रक्षा किसने की?

तभी आकाशवाणी (Celestial Voice) हुई। हे राजन! तुम यह सोच रहे हो कि तुम्हारी रक्षा किसने की? वास्तव में, यह तुम्हारे पूर्व जन्म में अनजाने में किए गए आमलकी एकादशी व्रत का फल है। उस व्रत के पुण्य प्रताप से ही आज तुम्हारी रक्षा हुई है। राजा वसुरथ यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें अपने पूर्व जन्म का बोध हो गया। वे वापस अपने राज्य आए और जीवन भर एकादशी का व्रत करते रहे।

( व्रत कथा समाप्त )

कथा का सार

दोस्तों, Amalaki Ekadashi Vrat Katha 2026 in Hindi का सबसे बड़ा सार यह है कि भक्ति और अच्छे कर्म कभी निष्फल नहीं जाते। चाहे हम जानबूझकर कोई पुण्य करें या अनजाने में, ईश्वर उसका फल हमें जरूर देते हैं। शिकारी ने न तो कोई मंत्र पढ़ा था और न ही उसे व्रत के नियमों का पता था, लेकिन उसने केवल भक्तों द्वारा किये गये भजन को भूखा-प्यासा रहकर सुना और रात्रि जागरण किया। इसी एक छोटे से अनजाने प्रयास ने उसके जीवन की दिशा बदल दी और जिसके फल स्वरूप उसे अगले जन्म में राजपाट और सुरक्षा प्रदान की।

यह कथा हमें सिखाती है कि प्रकृति (आंवले का वृक्ष) और ईश्वर की शरण में जाने से हमारे बड़े से बड़े संकट दूर हो जाते हैं। जैसे एक छोटा सा बीज (Seed) अनजाने में भी कहीं गिर जाए, तो वह समय आने पर एक विशाल पेड़ बन जाता है, वैसे ही पुण्य का एक छोटा सा बीज भी हमारे जीवन को सुरक्षा और समृद्धि से भर देता है।

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ॐ विष्णवे नम:।🙏

अस्वीकरण (Disclaimer): इस ब्लॉग में दी गई जानकारी विभिन्न विश्वसनीय पंचांग स्रोतों और मानक हिंदू कैलेंडर के आधार पर तैयार की गई है। यह जानकारी केवल सामान्य और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। व्रत, पूजा या किसी भी धार्मिक निर्णय से पहले पाठक Drik Panchang, ठाकुर प्रसाद पंचांग या स्थानीय पंडित से तिथि-मुहूर्त की स्वयं जाँच अवश्य करें। क्षेत्र और परंपरा के अनुसार तिथियों व विधियों में अंतर संभव है। किसी भी बदलाव या त्रुटि के लिए हमारा ब्लॉग जिम्मेदार नहीं होगा।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी क्यों कहते हैं?

उत्तर: दोस्तों, ऐसी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी आए थे, जहाँ उनका स्वागत रंगों और गुलाल से हुआ था, इसीलिए इसे रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) भी कहा जाता है।

प्रश्न: साल 2026 में आमलकी एकादशी व्रत कब है?

उत्तर: साल 2026 में आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा।

प्रश्न: इस व्रत में किस भगवान की मुख्य रूप से पूजा होती है?

उत्तर: इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) और आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है, साथ ही माता लक्ष्मी का आशीर्वाद भी लिया जाता है।

प्रश्न: आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है?

उत्तर: दोस्तों, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा के आंसुओं से हुई थी और इसमें समस्त देवी-देवताओं का वास होता है। इस दिन वृक्ष की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।


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