
हर हर महादेव 🙏,
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको एक ऐसी दिव्य और शक्तिशाली कथा सुनाने जा रहे हैं, जो भगवान काल भैरव के जन्म और कालाष्टमी व्रत के महत्व को उजागर करती है। जी हाँ दोस्तों, मैं बात कर रहा हूँ कालाष्टमी व्रत कथा (Kalashtami Vrat Katha 2026 In Hindi) की। कालाष्टमी व्रत की यह कथा हमें सिखाती है कि जब भी संसार में अहंकार (Ego) बढ़ता है, तो उसका अंत निश्चित होता है, और धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर स्वयं किसी न किसी रूप में अवतरित (Incarnate) होते हैं।
कालाष्टमी का पावन दिन भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भय, पाप, नकारात्मक शक्तियाँ और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं, और भगवान शिव ने इसी दिन भैरव रूप धारण कर अधर्म का नाश किया था।
शास्त्रों के अनुसार कालाष्टमी व्रत कथा का पाठ हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (Ashtami Tithi) को करना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। आइए, अब इस पौराणिक और प्रेरणादायक कालाष्टमी व्रत कथा (Kalashtami Vrat Katha 2026 In Hindi) को विस्तार से जानते हैं और साथ में जानेंगे भगवान काल भैरव जी के स्वरूप, वाहन और प्रिय भोग के बारे में भी।
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पौराणिक कालाष्टमी व्रत कथा(Mythological Kalashtami Vrat Katha)
(कथा आरंभ)
देवताओं की सभा: भगवान ब्रह्मा और महेश विवाद (Lord Brahma and Mahesh dispute)
प्राचीन काल की बात है, पवित्र सुमेरु पर्वत पर एक विशाल सभा का आयोजन हुआ, जिसमें समस्त देवी-देवता, ऋषि-मुनि और गंधर्व एकत्रित थे। उस सभा में एक अत्यंत गंभीर प्रश्न उठा “इस ब्रह्मांड का परम तत्व और सर्वश्रेष्ठ शक्ति कौन है?”
विवाद बढ़ता देख, भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने अत्यंत कुशलता और शांति से सुझाव दिया कि हमें स्वयं वेदों की शरण में जाना चाहिए, क्योंकि वेद ही अंतिम सत्य हैं। जब चारों वेदों से पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भगवान शिव (Lord Shiva) ही समस्त सृष्टि के आधार हैं, वे ही जन्म और मृत्यु से परे परमेश्वर हैं।
भगवान ब्रह्मा (Lord Brahma), जो उस समय पंचमुखी (पांच मुख वाले) थे, वेदों के इस निर्णय से सहमत नहीं हुए। ब्रह्मा जी का मानना था कि चूंकि वे सृष्टिकर्ता (Creator) हैं और उन्होंने ही इस पूरे संसार और देवताओं को बनाया है, इसलिए वे शिव से श्रेष्ठ हैं। उनका तर्क था कि शिव तो श्मशान में रहते हैं और भस्म लगाते हैं, तो वे एक रचयिता से ऊपर कैसे हो सकते हैं?
काल भैरव का प्राकट्य (Appearance of Kala Bhairava)
यह शब्दों का अपमान उस ब्रह्मांडीय संतुलन (Universal Balance) को चुनौती थी जिस पर पूरी सृष्टि टिकी है। जैसे-जैसे शब्द और कड़वे होते गए, वैसे-वैसे वातावरण में अशांति फैलने लगी। ब्रह्मा जी के घमंड को देखकर भगवान शिव क्रोधित हो उठे और क्रोध से भगवान शिव के शरीर से एक भयंकर ज्योति पुंज प्रकट हुआ, जिससे चारों ओर अंधकार छा गया। उसी दिव्य प्रकाश से एक विशाल और उग्र स्वरूप प्रकट हुआ, जिनका शरीर विशाल था, आंखें अग्नि की तरह लाल थीं और हाथ में दंड था। वही भयानक, तेजस्वी और शक्तिशाली रूप भगवान काल भैरव का था।
काल भैरव ने तुरंत ब्रह्मा जी के पाँचवें सिर को काट दिया, जो उनके अहंकार प्रतीक था। इससे ब्रह्मा जी का घमंड समाप्त हो गया और उन्हें अपने अपराध का गहरा पश्चाताप हुआ। भगवान शिव ने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि धरती पर तुम्हारी पूजा बहुत कम स्थानों पर होगी। यही कारण है कि आज ब्रह्मा जी के मंदिर गिने-चुने स्थानों पर ही मिलते है।
काल भैरव का प्रायश्चित और वरदान (Atonement and boon of Kaal Bhairav)
भले ही भैरव जी ने उचित कार्य किया था, पर ब्रह्मा जी का सिर काटने के कारण उन्हें ब्रह्म हत्या (Brahmahatya) का दोष लगा। भगवान शिव ने उन्हें पृथ्वी पर शरण लेने और तीर्थों के दर्शन करने का आदेश दिया। उन्होंने वर्षों तक तपस्या की और विभिन्न तीर्थों का भ्रमण किया भटकते हुए अंत में जब वे काशी (वाराणसी) पहुँचे, तो उनका पाप समाप्त हुआ।
भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया तुम काशी के कोतवाल (Kashi ke Kotwal) और क्षेत्रपाल कहलाओगे। बिना तुम्हारी अनुमति कोई भी काशी में प्रवेश नहीं कर सकेगा। इसी कारण भगवान काल भैरव को काशी के रक्षक (Guardian of Kashi) के रूप में पूजा जाता है। तभी से कहा जाता है कि भगवान काल भैरव समय (काल) के स्वामी (Lord of time) हैं और वे अपने भक्तों को भय, संकट और अनिष्ट शक्तियों से सुरक्षित रखते हैं।
जो व्यक्ति श्रद्धा और सच्चे मन से इस दिन पूजा करता है, उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होता है और इस व्रत को करने से आर्थिक समस्याओं से राहत व जिन जातकों की कुंडली में राहु, केतु या शनि दोष होता है उनके लिए कालाष्टमी व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में सहायक होता है। काल भैरव को पापों का नाश करने वाला माना जाता है। सच्चे मन से की गई पूजा से व्यक्ति के पूर्व जन्म(Previous Birth) और वर्तमान जीवन के पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
( व्रत कथा समाप्त )
भगवान काल भैरव: स्वरूप, वाहन और प्रिय भोग (Form, Vahan And Favorite Offering)
पुराणों के अनुसार भगवान भैरव के मुख्य रूप से आठ स्वरूप हैं, जिन्हें अष्ट भैरव कहा जाता है। इनका वाहन काला कुत्ता (Black Dog) है, जिसे खिलाना बहुत ही शुभ माना जाता है। भगवान भैरव को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है, जिनके दर्शन के बिना बाबा विश्वनाथ की पूजा अधूरी मानी जाती है। आध्यात्मिक स्तर पर, वे काल (समय) के अधिपति हैं, जो साधक को मृत्यु के भय से मुक्त करते हैं।
चढ़ावे (offerings) की बात करें, तो भगवान भैरव को इमरती, जलेबी, तली हुई चीजें और नारियल बहुत पसंद हैं। कई जगहों पर उन्हें कड़वा तेल (Mustard oil) और उड़द की दाल के बड़े भी अर्पित किए जाते हैं। दोस्तों, भगवान भैरव जितने कठोर दिखाई देते हैं, अपने भक्तों के लिए उतने ही दयालु हैं। वे अनुशासन और न्याय के देवता हैं, जो अहंकार का नाश कर सुरक्षा प्रदान करते हैं।
कथा का सार (Summary Of The Story)
भगवान काल भैरव का जन्म हमें सबसे बड़ी सीख यह देता है कि अहंकार (Ego) इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। जब ब्रह्मा जी को अपनी शक्तियों पर घमंड हुआ, तो उन्हें दंड मिला। आज के दौर में भी अगर हम देखें, तो कई बार थोड़े से पैसे, पद या ज्ञान के आने पर हम दूसरों को छोटा समझने लगते हैं। लेकिन काल भैरव की यह कथा हमें याद दिलाती है कि समय (Time) सबसे बलवान है और वह हर किसी का हिसाब करता है।
अब आपकी बारी:
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जय काल भैरव’ 🙏
अस्वीकरण (Disclaimer): इस ब्लॉग में दी गई व्रत कथा विभिन्न विश्वसनीय पंचांग स्रोतों और मानक हिंदू कैलेंडर के आधार पर तैयार की गई है। यह जानकारी केवल सामान्य और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। व्रत, पूजा या किसी भी धार्मिक निर्णय से पहले पाठक Drik Panchang, ठाकुर प्रसाद पंचांग या स्थानीय पंडित से तिथि-मुहूर्त की स्वयं जाँच अवश्य करें। क्षेत्र और परंपरा के अनुसार तिथियों व विधियों में अंतर संभव है। किसी भी बदलाव या त्रुटि के लिए हमारा ब्लॉग जिम्मेदार नहीं होगा।
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: भगवान काल भैरव का जन्म किस तिथि को हुआ था?
उत्तर: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान काल भैरव का जन्म मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। इसी कारण इस दिन को कालाष्टमी (Kalashtami) या भैरव अष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
प्रश्न: काल भैरव की सवारी कुत्ता (Dog) ही क्यों है?
उत्तर: हिंदू धर्म में कुत्ता वफादारी और सतर्कता का प्रतीक है। भगवान भैरव समय (Kaal) के देवता हैं और कुत्ता आने वाले खतरों को पहले ही भांप लेता है। इसीलिए भैरव बाबा की पूजा में कुत्तों को खाना खिलाना, विशेषकर काले कुत्ते की सेवा करना बहुत फलदायी माना जाता है।
प्रश्न: क्या काल भैरव और महाकाल एक ही हैं?
उत्तर: भगवान काल भैरव, शिव के ही अवतार हैं। महाकाल शिव का वह रूप है जो समय से परे है, और भैरव वह रूप है जो काल (समय) का संचालन और न्याय करता है। दोनों ही रूप विनाशकारी और रक्षक दोनों शक्तियों को दर्शाते हैं।
प्रश्न: काल भैरव का मुख्य मंत्र क्या है?
उत्तर: ॐ कालभैरवाय नमः यह मंत्र भय दूर करता है और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है।
प्रश्न: भगवान काल भैरव को काशी का कोतवाल क्यों कहा जाता है?
उत्तर: भगवान शिव ने काल भैरव को वरदान दिया कि वे काशी नगरी के रक्षक (कोतवाल) बनेंगे और बिना उनकी अनुमति कोई भी काशी में प्रवेश नहीं कर सकेगा।



