Sankashti Chaturthi 2026 Dates In Hindi: पूजा सामग्री की चेकलिस्ट (Checklist) | Free PDF Download

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Sankashti Chaturthi 2026 Dates In Hindi

नमस्कार, कैसे हैं आप सभी?
दोस्तों, हम सभी के जीवन में कभी न कभी ऐसा दौर ज़रूर आता है जब परेशानियाँ और मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं लेतीं। ऐसे समय में इंसान एक ऐसे सहारे की तलाश करता है, जो उसके जीवन से विघ्न और संकट दूर कर सके। इसी विश्वास के साथ हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर लोग भगवान गणेश का व्रत रखते हैं, जिसे उनकी विशेष कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है। Sankashti Chaturthi 2026 Dates In Hindi से जुड़ा यह ब्लॉग खास संकष्टी व्रत प्रेमियों के लिए है।

चतुर्थी व्रत मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है, विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी। लेकिन इस ब्लॉग में हम केवल संकष्टी चतुर्थी के बारे में विस्तार से बात करने वाले हैं। कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, “संकष्टी” का अर्थ होता है, संकटों का नाश करने वाली। दोस्तों, भगवान गणेश की भक्ति में वह शक्ति है जो बड़े से बड़े अवरोध (Obstacles) को भी दूर कर सकती है, इसलिए कृष्ण पक्ष की यह चतुर्थी भक्तों के लिए बेहद विशेष मानी जाती है।

अगर आप वर्ष 2026 की सभी संकष्टी चतुर्थी व्रत की तिथियों के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमारे इस ब्लॉग में आपको साल 2026 की सभी संकष्टी चतुर्थी तिथियों की सटीक जानकारी मिलेगी। इसके साथ ही वहाँ आपको पूजा विधि और पूजा सामग्री की पूरी सूची भी मिलेगी, जो आपके व्रत और पूजा की Planning में बहुत काम आने वाली है। इसके अलावा, आप चाहें तो व्रत तिथियों की एक Designer और Beautiful PDF भी नीचे ब्लॉग के आखिर में दिए गए लिंक से बिल्कुल Free Download कर सकते हैं।

📅 संकष्टी चतुर्थी 2026 व्रत लिस्ट (Sankashthi Chaturthi 2026 Vrat List)

दोस्तो, हिन्दू पंचांग के अनुसार, यदि यह तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है, जिसका महत्व सामान्य चतुर्थी से कई गुना अधिक होता है। हर महीने में एक संकष्टी चतुर्थी आती है, और साल भर में कुल 12 (और कभी-कभी 13) चतुर्थी होती हैं। हर महीने की चतुर्थी का एक अलग नाम और एक अलग पीठ (Deity Form) होता है।

तो हमने आपके लिए Sankashti Chaturthi 2026 Dates In Hindi ब्लॉग के इस सेक्शन में नीचे एक पूरी लिस्ट तैयार की है। यह लिस्ट आपको पूरे साल आने वाली संकष्टी चतुर्थी की तिथियों को समझने में मदद करेगी।

तारीख/साल/दिनव्रत और त्योहारमाह/पक्ष/तिथि
6 जनवरी, 2026, मंगलवारसकट चौथ, लम्बोदर संकष्टीमाघ, कृष्ण चतुर्थी
5 फरवरी, 2026, बृहस्पतिवारद्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थीफाल्गुन, कृष्ण चतुर्थी
6 मार्च, 2026, शुक्रवारभालचन्द्र संकष्टी चतुर्थीचैत्र, कृष्ण चतुर्थी
5 अप्रैल, 2026, रविवारविकट संकष्टी चतुर्थीवैशाख, कृष्ण चतुर्थी
5 मई, 2026, मंगलवारएकदन्त संकष्टी चतुर्थीज्येष्ठ, कृष्ण चतुर्थी
4 जून, 2026, बृहस्पतिवारविभुवन संकष्टी चतुर्थीअधिक ज्येष्ठ, कृष्ण चतुर्थी
3 जुलाई, 2026, शुक्रवारकृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थीआषाढ़, कृष्ण चतुर्थी
2 अगस्त, 2026, रविवारगजानन संकष्टी चतुर्थीश्रावण, कृष्ण चतुर्थी
31 अगस्त, 2026, सोमवारबहुला चतुर्थी, हेरम्ब संकष्टीभाद्रपद, कृष्ण चतुर्थी
29 सितम्बर, 2026, मंगलवारविघ्नराज संकष्टी चतुर्थीआश्विन, कृष्ण चतुर्थी
29 अक्टूबर, 2026, बृहस्पतिवारवक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थीकार्तिक, कृष्ण चतुर्थी
27 नवम्बर, 2026, शुक्रवारगणाधिप संकष्टी चतुर्थीमार्गशीर्ष, कृष्ण चतुर्थी
27 दिसम्बर, 2026, रविवारअखुरथ संकष्टी चतुर्थीपौष, कृष्ण चतुर्थी

👉यदि आप वर्ष 2026 संकष्टी चतुर्थी को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो इसकी हिंदी PDF उपलब्ध है। ब्लॉग के अंत में दिए गए डाउनलोड लिंक से आप इस PDF को आसानी से अपने मोबाइल या डेस्कटॉप में सेव कर सकते हैं।

संकष्टी चतुर्थी व्रत / उपवास, महत्व(Sankashti Chaturthi Vrat & Upwas, Mahatv)

दोस्तों, हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य का दर्जा दिया गया है। ऐसी मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत यदि भगवान गणेश के नाम और पूजा से की जाए, तो वह कार्य सफल और मंगलमय बन जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, जो अपने भक्तों के जीवन से हर प्रकार के संकट और बाधाओं को दूर करते हैं। इसी तरह, यदि हिन्दू महीने की शुरुआत में संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश की सच्ची श्रद्धा के साथ किया जाए, तो जीवन में सुख, शांति, सफलता और समृद्धि के मार्ग में आने वाली रुकावटें, परेशानियाँ और नकारात्मक प्रभाव (Negative Effects) धीरे-धीरे अपने आप दूर होने लगते हैं।

संकष्टी चतुर्थी का व्रत मुख्य रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और गोवा में सबसे अधिक प्रचलित है। इन राज्यों में यह व्रत बड़ी श्रद्धा और नियमितता के साथ रखा जाता है, क्योंकि यहाँ भगवान गणेश की पूजा और भक्ति की परंपरा बेहद मजबूत मानी जाती है। महाराष्ट्र का प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर भक्तों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है। यहाँ विराजमान गणेश जी को सिद्धिविनायक कहा जाता है, जिन्हें संकटों को हरने और मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला माना जाता है।

संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि (Sankashti Chaturthi puja vidhi)

दोस्तों, यह व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय पर समाप्त होता है और यदि इसे सही विधि, श्रद्धा और नियम से किया जाए, तो भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए अब जानते हैं, कि विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा (Worship of Lord Ganesha) को सही विधि से कैसे किया जाता है, इसकी पूजा की शुरुआत कैसे करें और व्रत का पारण किस प्रकार करना चाहिए। नीचे सुबह से लेकर रात तक की Step-By-Step पूजा विधि दी गई है।

  • सुबह की शुरुआत और संकल्प: इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान अत्यंत शुभ माना जाता है। इसलिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें और पूरे श्रद्धा भाव के साथ भगवान गणेश के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • सुबह की पूजा विधि: गणेश जी को दूर्वा, फूल, सिंदूर, धूप-दीप अर्पित करें और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
  • दिनभर के नियम: फलाहार रखें (फल, दूध, साबूदाना), नकारात्मक सोच से बचें और “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
  • शाम की मुख्य पूजा और कथा: संध्या समय गणेश जी की पूजा करें, व्रत कथा पढ़ें या सुनें और आरती करें।
  • चंद्र दर्शन और व्रत पारण: चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें, भगवान गणेश को प्रणाम करें और प्रसाद खाकर व्रत खोलें।

Note: संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण चंद्र दर्शन (Chandra Darshan) के बाद ही किया जाता है। वहीं शुक्ल पक्ष की चतुर्थी में इसका नियम इसके विपरीत होता है। इसकी पूरी और विस्तृत जानकारी हम अपने अगले ब्लॉग में विस्तार से बताएँगे।

संकष्टी चतुर्थी पूजा सामग्री लिस्ट (Sankashti Chaturthi Puja Samagri List)

हमने आपके लिए पूजा सामग्री की एक पूरी लिस्ट (Checklist) तैयार की है, ताकि आपकी पूजा के समय पहले सभी जरुरी सामान Arrange करलें:

क्रम
संख्या
सामग्री का नाम
(Item Name)
महत्व (Significance)
1भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीरपूजा का मुख्य केंद्र
2दूर्वा (Durva Grass)गणेश जी को अत्यंत प्रिय (कम से कम 21 या 108 गांठें)
3कलश (Kalash)तांबे या पीतल का लोटा
4गंगा जलपूजा स्थान शुद्ध करने के लिए
5लाल कपड़ाचौकी पर बिछाने के लिए
6अक्षत (Rice)बिना टूटे हुए चावल
7चंदन, कुमकुम और रोलीतिलक लगाने के लिए
8शुद्ध घी का दीपकआरती, अखंड ज्योत और चंद्र दर्शन के समय जलाने के लिए
9धूप और अगरबत्तीवातावरण को शुद्ध करने के लिए
10फूल (Flowers)विशेषकर लाल रंग के फूल (जैसे गुड़हल)
11पान और सुपारीसंकल्प और पूजा के लिए
12मोदक या लड्डूमुख्य भोग (Prasad)
13फलकेला, सेब, संतरा आदि फल भोग के रूप में अर्पित करने के लिए
14नारियलपूर्णता व समर्पण का प्रतीक
15गुड़ / शक्करमिठास व भोग अर्पण के लिए
16लड्डूप्रसाद व भोग के लिए
17जलचंद्र देव को अर्घ्य देने के लिए
18दूधचंद्र देव को अर्घ्य देने के लिए
19पूजा की थालीपूजा का सामान रखने के लिए

पूजा के लिए कुछ विशेष बातें (TpisiLife Special)

  • पंचामृत (Panchamrit): दोस्तों, गणेश जी का अभिषेक पंचामृत से ही करना शुभ माना जाता है, इसके लिए दूध, दही, शहद, घी और चीनी का पंचामृत मिश्रण जरूर बनाएं।
  • व्रत कथा (Vrat Katha): संकष्टी चतुर्थी की कथा के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है, इसलिए पूजा के समय किताब पास रखें या इसे ऑनलाइन पढ़ सकते हैं।
  • चंद्र दर्शन (Moon Sighting): याद रखिये, संकष्टी चतुर्थी का व्रत रात को चंद्रमा को अर्घ्य (Arghya) देने के बाद ही पूरा होता है, इसलिए अर्घ्य के लिए दूध मिला हुआ जल और एक थाली अलग से तैयार रखें।

मेरा विचार (My Opinion)

दोस्तों, तो ये थीं संकष्टी चतुर्थी से जुड़ी कुछ खास जानकारियाँ, जहाँ हमने सभी तिथियाँ और उनके साथ जुड़े Others Topics को Detailed में देखा। इसकी पूजा विधि बहुत ही Easy है, जिसे आप हमारे बताए गए तरीकों से घर पर आसानी से कर सकते हैं। व्रत से पहले ही पूजा का सारा सामान अपनी क्षमता के अनुसार पहले ही खरीद कर रख लें। लेकिन ध्यान रहे, जो भी करें, सच्ची श्रद्धा (True Faith) और पूरे मन से करें, न कि किसी दिखावे या दबाव में।

जब हम सच्चे मन से बप्पा की शरण में जाते हैं, तो हमारे जीवन के सभी संकट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं और घर में सुख-शांति का वास होता है। दोस्तों, मुझे पूरी उम्मीद है कि Sankashti Chaturthi 2026 Dates In Hindi से जुड़ी यह जानकारी आपके लिए बेहद उपयोगी रही होगी। इसकी मदद से आप अपने व्रत और पूजा की Planning पहले से ही सही ढंग से कर पाएंगे।

तो चलिए दोस्तों, अब मैं इस ब्लॉग को यहीं समाप्त करता हूँ और फिर मिलेंगे किसी नई और उपयोगी जानकारी से भरे ब्लॉग में। तब तक नीचे दी गई Free PDF को ज़रूर Download करें और अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने परिवार और मित्रों के साथ सोशल मीडिया पर ज़रूर शेयर करें, ताकि वे भी बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
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गणपति बप्पा मोरया! 🙏

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संकष्टी चतुर्थी 2026 व्रत लिस्ट
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अस्वीकरण (Disclaimer): इस ब्लॉग में दी गई जानकारी विभिन्न विश्वसनीय पंचांग स्रोतों और मानक हिंदू कैलेंडर के आधार पर तैयार की गई है। यह जानकारी केवल सामान्य और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। व्रत, पूजा या किसी भी धार्मिक निर्णय से पहले पाठक Drik Panchang, ठाकुर प्रसाद पंचांग या स्थानीय पंडित से तिथि-मुहूर्त की स्वयं जाँच अवश्य करें। क्षेत्र और परंपरा के अनुसार तिथियों व विधियों में अंतर संभव है। किसी भी बदलाव या त्रुटि के लिए हमारा ब्लॉग जिम्मेदार नहीं होगा।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व क्या है?

उत्तर: संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित एक पुण्यदायी व्रत है, जो जीवन के कष्ट, बाधाएँ और नकारात्मकता को दूर करने में सहायक माना जाता है। इस व्रत को करने से मानसिक शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्रदान करता है।

प्रश्न: संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?

उत्तर: दोस्तों, पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी (कृष्ण पक्ष) कहते हैं, जिसमें चाँद की पूजा होती है। वहीं अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी (शुक्ल पक्ष) कहते हैं, जिसमें दोपहर में गणेश जी की पूजा होती है।

प्रश्न: संकष्टी चतुर्थी व्रत किस दिन रखा जाता है?

उत्तर: संकष्टी चतुर्थी व्रत हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण करते हैं।

प्रश्न: साल 2026 में कुल कितनी संकष्टी चतुर्थी व्रत पड़ेंगे और इसके पीछे क्या कारण है?

उत्तर: साल 2026 में कुल 13 संकष्टी चतुर्थी व्रत पड़ेंगे। क्योंकि इस वर्ष एक महीने में अधिक मास (‘मलमल मास’) होने के कारण संकष्टी चतुर्थी 12 की बजाय 13 बार मनाई जाएगी

प्रश्न: संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब तक रखना चाहिए?

उत्तर: आप इसे अपनी किसी विशेष मनोकामना के लिए 11, 21 या 51 चतुर्थी तक करने का संकल्प ले सकते हैं, या फिर इसे जीवन भर अपनी श्रद्धा के अनुसार जारी रख सकते हैं।


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