
नमस्कार दोस्तों,
आज हम आपके लिए शिव महिमा का गुणगान करने वाली प्रदोष व्रत कथा लेकर आए हैं। शुक्र प्रदोष व्रत के दिन इस कथा का पाठ करना बहुत ही लाभकारी बताया जाता है, और मान्यता है कि इस कथा का पाठ किए बिना प्रदोष व्रत पूर्ण नहीं होता।
शुक्र प्रदोष व्रत कथा (Shukra Pradosh Vrat Katha 2026 in Hindi) में हम जानेंगे कि कैसे एक गरीब ब्राह्मणी के जप-तप ने अपनी और एक अभागे राजकुमार की किस्मत बदलकर रख दी।
दोस्तों, सभी पुण्यदायी व्रतों में प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने और भाग्य उदय के लिए किया जाने वाला एक बहुत ही कारगर उपाय माना गया है। जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के शुभ दिन पड़ती है, तब यह व्रत शुक्र प्रदोष व्रत कहलाता है। यह व्रत भगवान शिव-पार्वती की आराधना के साथ-साथ शुक्र ग्रह के शुभ प्रभाव को बढ़ाने वाला माना जाता है।
हम इस ब्लॉग में कथा के साथ-साथ जानेंगे की शुक्र प्रदोष व्रत की चमत्कारी कथा पढ़ना और सुनना क्यों इतना प्रभावशाली माना जाता है। इसके साथ ही हम यह भी जानेंगे कि वर्ष 2026 में कितने शुक्र प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं, तथा उनसे जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में नीचे विस्तारपूर्वक चर्चा करेंगे। तो चलिए अब आगे चलते है:
शुक्र प्रदोष व्रत 2026 की तिथियां
Shukra Pradosh Vrat Katha 2026 in Hindi पढ़ने से पहले हम जल्दी से साल 2026 में आने वाले सभी शुक्र प्रदोष व्रत की तिथियाँ जान लेते हैं, जिससे आपको आसानी हो और यह याद रहे कि कब-किस दिन आपको इस पावन कथा का पाठ करना है। तो चलिए, नीचे दी गई सूची में देखते हैं सभी शुक्र प्रदोष व्रत से जुड़ी जानकारी।
साल 2026 में शुक्र प्रदोष व्रत निम्न तिथियों पर मनाया जायेगा :
| तारीख/साल/दिन | माह/पक्ष/तिथि |
| ✅16 जनवरी, 2026, शुक्रवार | माघ, कृष्ण त्रयोदशी |
| ✅30 जनवरी, 2026, शुक्रवार | माघ, शुक्ल त्रयोदशी |
| ✅12 जून, 2026, शुक्रवार | ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी |
| ✅23 अक्टूबर, 2026, शुक्रवार | आश्विन, शुक्ल त्रयोदशी |
| ✅6 नवम्बर, 2026, शुक्रवार | कार्तिक, कृष्ण त्रयोदशी |
शुक्र प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा (shukra pradosh vart katha 2026)
(कथा आरंभ)
ब्राह्मणी का दुःखमय जीवन और करुणा की परीक्षा
भगवान शिव का ध्यान करते हुए इस पवित्र कथा को शुरू करते है, प्राचीन काल में एक समृद्ध नगर में एक निर्धन ब्राह्मणी अपने पुत्र के साथ रहती थी। उसके पति का समय से पहले निधन हो गया था, जिसके बाद उसका जीवन पूरी तरह बदल गया। पति की मृत्यु के बाद न तो उसके पास धन था, और न ही कोई सहारा। समाज की उपेक्षा और कठिन परिस्थितियों के बीच वह रोज़ भिक्षा माँगकर अपने बेटे का पालन-पोषण कर रही थी।
इतने दुःख और कष्ट के बावजूद ब्राह्मणी का मन बहुत ही निर्मल और करुणामय था। वह भगवान शिव में अटूट श्रद्धा रखती थी और हर कष्ट को उनकी इच्छा मानकर सहन करती थी। एक दिन जब वह रोज़ की तरह भिक्षा लेकर घर लौट रही थी, तो रास्ते में नदी के किनारे उसकी दृष्टि एक घायल और मूर्छित (unconscious) बालक पर पड़ी। बालक के वस्त्र फटे हुए थे और शरीर पर चोट के गहरे निशान थे।
ब्राह्मणी का दिल पसीज गया। बिना किसी स्वार्थ के, उसने उस बालक को सहारा दिया, उसे पानी पिलाया और अपने साथ घर ले आई। बाद में उसे पता चला कि वह कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि विदर्भ देश का राजकुमार था। शत्रुओं ने युद्ध में उसके पिता को पराजित (defeated) कर उसका राज्य छीन लिया था और राजकुमार किसी तरह जान बचाकर भाग निकला था।
ब्राह्मणी ने उसे अपने सगे बेटे की तरह अपनाया, और उसने कभी भी दोनों बच्चों में कोई फर्क किया। दोनों को समान प्रेम, भोजन और संस्कार दिए। यही करुणा और बिना किसी स्वार्थ के की गई सेवा आगे चलकर उसके जीवन में चमत्कारी परिवर्तन का कारण बनी।
ऋषि शाण्डिल्य का उपदेश और शुक्र प्रदोष व्रत की साधना
कुछ समय बीतने पर ब्राह्मणी दोनों बालकों को लेकर महर्षि शाण्डिल्य के आश्रम पहुँची। वह अपने जीवन के कष्टों से थक चुकी थी और उसका समाधान चाहती थी और साथ ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना चाहती थी। महर्षि ने अपनी दिव्य दृष्टि से ब्राह्मणी के पूर्व जन्मों के पुण्य और वर्तमान जीवन के संघर्ष को समझ लिया।
ऋषि शाण्डिल्य ने उसे बताया कि उसके जीवन में जो भी दुःख हैं, वे पूर्व जन्म के कर्मों का फल हैं, लेकिन यदि वह श्रद्धा और नियमपूर्वक शुक्र प्रदोष व्रत करे, तो भगवान शिव की कृपा से उसका भाग्य जरूर बदलेगा। ऋषि ने शुक्र प्रदोष व्रत की विधि, महत्व और फल का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार को आती है, तो वह दिन शुक्र प्रदोष कहलाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ शुक्र ग्रह की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शुक्र ग्रह जीवन में सुख, सौंदर्य, वैवाहिक आनंद, ऐश्वर्य और भौतिक समृद्धि (Material Prosperity/Affluence)का कारक है। इस व्रत को करने से दरिद्रता, दुर्भाग्य और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
ब्राह्मणी ने महर्षि के वचन को दिल से स्वीकार किया और उसी दिन से श्रद्धा, नियम और निष्काम भाव से शुक्र प्रदोष व्रत करना शुरू कर दिया। वह प्रत्येक शुक्रवार त्रयोदशी को उपवास रखती, शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और सफेद पुष्प अर्पित करती तथा शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव की आरती करती।
धीरे-धीरे उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन (Positive Change) दिखाई देने लगे। घर का वातावरण शांत और मंगलमय होने लगा। दोनों बालकों में तेज, बुद्धि और आत्मविश्वास बढ़ने लगा। यह सब शिव जी की कृपा और शुक्र प्रदोष व्रत (Shukra Pradosh Vrat) के प्रभाव से ही संभव हुआ था।
शिव कृपा से भाग्योदय, विवाह और राज्य की प्राप्ति
एक दिन विदर्भ का राजकुमार वन में घूम रहा था। वही उसकी मुलाकात गंधर्व कन्या अंशुमती से हुई। दोनों को पहली ही मुलाकात में एक-दूसरे के प्रति लगाव हो गया और धीरे-धीरे यह लगाव प्रेम में बदल गया। जब गंधर्व राजा को इस प्रेम के बारे में पता चला तो, उन्होंने राजकुमार की वास्तविक पहचान जानने के लिए जाँच करवाई।
सच्चाई सामने आने पर गंधर्व राजा अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने राजकुमार के गुण, संस्कार और उसके संघर्षपूर्ण जीवन को देखकर अपनी पुत्री अंशुमती का विवाह उससे कर दिया। यह विवाह भी भगवान शिव की कृपा और ब्राह्मणी द्वारा किए गए शुक्र प्रदोष व्रत का ही फल था।
विवाह के बाद गंधर्व सेना की मदद से राजकुमार ने अपने शत्रुओं पर आक्रमण किया। शिव जी कृपा से वह युद्ध में विजयी हुआ और उसने अपना खोया हुआ विदर्भ राज्य को फिर से जीत लिया। राज्य प्राप्त होते ही उसने सबसे पहले उस ब्राह्मणी को सम्मानपूर्वक राजमहल बुलाया, जिसने संकट की घड़ी में उसे शरण दी थी।
राजकुमार ने ब्राह्मणी और उसके पुत्र को राजमहल में सम्मान और उच्च स्थान प्रदान किया। ब्राह्मणी का गरीब जीवन अब सुख-समृद्धि में बदल चुका था, लेकिन उसके मन में न अहंकार (ego) था और न ही लोभ (greed)। वह आज भी भगवान शिव और शुक्र प्रदोष व्रत के प्रति वही श्रद्धा और भाव रखती थी
इस प्रकार, शुक्र प्रदोष व्रत की महिमा से न केवल एक निर्धन ब्राह्मणी का जीवन बदला, बल्कि एक राजकुमार को उसका खोया हुआ राज्य, प्रेम और सम्मान भी प्राप्त हुआ।
( व्रत कथा समाप्त )
कथा का सार
यह कथा साफ़ बताती है कि जब इंसान सच्चे मन और करुणा (compassion) से, बिना किसी स्वार्थ के सेवा और श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा करता है, तो उसकी सोई किस्मत भी जाग जाती है। और जीवन सुख, शांति व समृद्धि से भर जाता है। दोस्तों इस कथा से हमें यह सीख मिलती है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक शुक्र प्रदोष व्रत का पालन करता है, उसके जीवन से दरिद्रता, मानसिक अशांति, वैवाहिक बाधाएं और आर्थिक समस्याएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। साथ ही यह व्रत हमें दो अमूल्य जीवन-संदेश देता है:
धैर्य: कठिन समय में भी धर्म और सत्य के मार्ग से विचलित न होना।
समर्पण: पूर्ण विश्वास के साथ ईश्वर को अपने कर्म समर्पित करना।
हमें बताएं:
📢 दोस्तों क्या आप भी इस 2026 वर्ष में अपने जीवन में धन-समृद्धि, मानसिक शांति, वैवाहिक सुख और भाग्य की प्रगति चाहते हैं, तो इस शुभ अवसर पर शुक्र प्रदोष व्रत जरूर करें। और कोई भी व्रत, पूजा या इस ब्लॉग से जुड़े कोई सवाल है तो हमें जरूर कमेंट करे।
याद रखें, महादेव को प्रसन्न करने के लिए आडंबर नहीं, बल्कि एक लोटा जल, सच्ची श्रद्धा और निष्काम भक्ति ही पर्याप्त है।
👉 इस पावन व्रत को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और इस कथा को अपने परिवार व मित्रों के साथ साझा करें, ताकि वे भी शिव कृपा का अनुभव कर सकें।
ॐ नमः शिवाय 🙏
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व्रत, पूजा अथवा किसी भी धार्मिक निर्णय से पूर्व पाठक अपनी सुविधा एवं आवश्यकता के अनुसार Drik Panchang, ठाकुर प्रसाद पंचांग जैसे अन्य प्रामाणिक पंचांगों से भी समय एवं तिथि की स्वयं जाँच अवश्य कर लें अथवा अपने स्थानीय मंदिर, विद्वान पंडित या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श करें। क्षेत्र, स्थान एवं स्थानीय परंपराओं के अनुसार तिथियों, मुहूर्तों एवं विधियों में अंतर संभव है। कैलेंडर में होने वाले किसी भी परिवर्तन, भिन्नता या संभावित त्रुटि के लिए हमारा ब्लॉग उत्तरदायी नहीं होगा।
❓ शुक्र प्रदोष व्रत में जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: sukra pradosh vart katha 2026 कहाँ पढ़ सकते हैं?
उत्तर: आप sukra pradosh vart katha 2026 in Hindi इसी लेख में विस्तार से पढ़ सकते हैं, जहाँ ब्राह्मणी का दुःखमय जीवन और करुणा की परीक्षा के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है
प्रश्न: शुक्र प्रदोष व्रत करने से क्या-क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
उत्तर: शुक्र प्रदोष व्रत करने से जीवन में सौभाग्य, धन-समृद्धि, वैवाहिक सुख और भौतिक ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। यह व्रत पारिवारिक कलह और दांपत्य जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है। साथ ही, यह व्रत शत्रुओं पर विजय और मानसिक शांति प्रदान करता है।
प्रश्न: प्रदोष काल क्या होता है और इसका महत्व क्यों है?
उत्तर: प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक होता है।
शास्त्रों में बताया गया है कि इस समय भगवान शिव बहुत प्रसन्न रहते हैं और कैलाश पर्वत पर भ्रमण करते हैं। इसलिए प्रदोष काल में की गई शिव पूजा को बेहद शुभ और फल देने वाला माना जाता है।
प्रश्न: शुक्र प्रदोष व्रत में कौन सी कथा पढ़नी चाहिए?
उत्तर: शुक्र प्रदोष व्रत के दिन सबसे पहले शुक्र प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा पढ़ना चाहिए जिसमें निर्धन ब्राह्मणी और विदर्भ के राजकुमार की कथा के माध्यम से व्रत की महिमा बताई गई है।
प्रश्न: ब्राह्मणी और राजकुमार के जीवन में कौन-कौन से परिवर्तन आए?
उत्तर: ब्राह्मणी के शुक्र प्रदोष व्रत से शिव कृपा मिली और उसका जीवन सुख व सम्मान से भर गया। वहीं राजकुमार को भी शिव कृपा से विवाह का सुख और राज्य प्राप्त हुआ, और उसका जीवन पहले जैसा समृद्ध बन गया।



