Mahashivratri 2026 kab hai: 15 या 16 फरवरी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Mahashivratri 2026 kab hai

हर हर महादेव 🙏
नमस्कार दोस्तों! कैसे हैं आप सब?

दोस्तों, साल का वो सबसे बड़ा और पावन दिन आने वाला है, जिसका हम सभी शिव भक्तों को बड़ी बेसब्री से इंतज़ार रहता है। जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) की। हमेशा की तरह इस साल भी सबके मन में एक ही सवाल है कि महाशिवरात्रि 2026 कब है (Mahashivratri 2026 kab hai), 15 या 16 फरवरी? तो चलिए, उलझन और देर किस बात की हमारी ये जानकारी से भरा ब्लॉग आप तक महाशिवरात्रि 2026 से जुडी सारी सही और सटीक जानकारी आप तक पहुचायेगा।

दोस्तों, मैं जब भी महाशिवरात्रि के दिन सुबह उठकर मंदिर जाता हूँ, तो हर बार वो आस्था की भीड़, वो चंदन से लिपटे बेलपत्रों की खुशबू, और लोगों का उत्साह देखकर मन पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। चारों तरफ गूंजते “बम-बम भोले” के जयकारे अपने-आप कानों से उतरकर सीधे दिलो-दिमाग पर छा जाते हैं। ऐसा लगता है कि बस यही पल सत्य (Truth) है, बाकी सब मिथ्या (Maya) है

आज के इस डिटेल ब्लॉग (Detailed Blog) में, हमने कोशिश की है कि आपको महाशिवरात्रि 2026 से जुड़ी सभी ज़रूरी बातें बताएँगे, जैसे इसका महत्व, तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि। इसलिए दोस्तों, इस लेख को पूरा पढ़ें ताकि आप महाशिवरात्रि का व्रत सही तरीके से कर सकें और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त कर सकें।🙏

महाशिवरात्रि 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (MahaShivratri 2026 date and time)

दोस्तों, तो ब्लॉग के इस सेक्शन हम जानेंगे: Mahashivratri 2026 kab hai, 15 या 16 फरवरी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि का पावन पर्व हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि, यानी मध्यरात्रि (निशीथ काल / Midnight) में मनाया जाता है। साल 2026 में चतुर्दशी तिथि (Chaturdashi Tithi) 15 फरवरी से शुरू होकर 16 फरवरी को खत्म हो रही है, और चतुर्दशी तिथि की मध्यरात्रि इस बार 15 फरवरी की रात में ही व्याप्त है। इसी वजह से इस साल 15 फरवरी को ही शिवरात्रि मनाई जाएगी

चलिए दोस्तों, अब इसे महाशिवरात्रि सभी शुभ मुहूर्त की जानकारी Table के Form में भी देख लेते हैं: 👇

महाशिवरात्रि 2026 से संबंधित सभी महत्वपूर्ण समय और जानकारी:

फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि प्रारंभ:15 फरवरी 2026, रविवार शाम 05:04 pm से
फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि समाप्त:16 फरवरी 2026, सोमवार शाम 05:34 pm पर
महाशिवरात्रि 2026 मनायी जाएगी:15 फरवरी 2026, रविवार को (निशिता काल के अनुसार) 
महाशिवरात्रि 2026: पूजा समय (Time)
(निशिता काल मुख्य पूजा का श्रेष्ठ समय)
16 फरवरी 2026, रात 12:09 am से रात 01:01 am तक
कुल शुभ अवधि: 51 मिनट
महाशिवरात्रि व्रत पारण समय16 फरवरी 2026, सुबह 6:59 am से दोपहर 03:34 pm तक
✅ रात के पहले पहर की पूजा समय
✅ रात के दूसरे पहर की पूजा समय
✅ रात के तीसरे पहर की पूजा समय
✅ रात के चौथे पहर की पूजा समय
15 फरवरी 06:11 pm से 09:23 pm तक
15 फरवरी 09:23 pm से 16 फरवरी 12:35 am तक

16 फरवरी 12:35 am से 03:47 am तक
16 फरवरी
03:47 am से 06:59 am तक

👉 यदि आप इस लिस्ट को बाद में देखने के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो इसका हिंदी PDF उपलब्ध है। आप ब्लॉग के अंत में दिए गए डाउनलोड बटन से इसे अपने मोबाइल या डेस्कटॉप में सेव कर सकते हैं।

महाशिवरात्रि का महत्व (Maha Shivratri Importance)

आगे बढ़ने से पहले हमें यह जानना ज़रूरी है कि आखिरकार यह शिवरात्रि इतनी पावन और इतनी विशेष क्यों मानी जाती है? और यह हम सभी के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों बन जाती है? जबकि साल में 12 मासिक चतुर्दशी आती हैं, फिर सिर्फ फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की इसी चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि का नाम क्यों दिया गया?

दरअसल, इन सभी सवालों का जवाब इसी रात के पौराणिक (Pauranik) और आध्यात्मिक (Spiritual) महत्व में छिपा हुआ है। आइए, मिलकर जानते हैं और समझते हैं इस रहस्य (Mystery) को:

महाशिवरात्रि का पौराणिक महत्व:

धार्मिक मान्यताओ और पौराणिक कथाओं का अगर Reference लिया जाए, तो महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। यूँ कहें तो इसी दिन ब्रह्मांड के सबसे बड़े योगी, महादेव ने वैराग्य छोड़कर गृहस्थ जीवन (Married Life) में कदम रखा था। इसी प्रकार यह पर्व वैराग्य और गृहस्थ जीवन के संतुलन का प्रतीक माना जाता है।

शिव जी शुद्ध चेतना हैं और पार्वती जी शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। इनके मिलन से यह संदेश मिलता है कि सृष्टि का संचालन तभी संभव है जब चेतना (Consciousness) और ऊर्जा (Energy) एक-दूसरे के पूरक(Complementary) हों। और तभी से इस रात को महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) के नाम से जाना जाने लगा, और आज यह रात्रि पूरे भारतवर्ष में महाशिवरात्रि के रूप में बड़े श्रद्धा-भाव से मनाई जाती है।

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व:

आध्यात्मिक दृष्टि से महाशिवरात्रि आत्म-शुद्धि (Self-purification) की रात्रि मानी जाती है। यह अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है।

अहंकार का विसर्जन (Ego Letting Go): भगवान शिव जी का अर्थ ही है “कल्याण”। इस दिन भक्त अपने अंदर छिपे अहंकार, क्रोध, मोह और आसक्ति को छोड़ने का प्रयास करते हैं और शिव भक्ति में लीन हो जाते हैं।

आत्म-बोध की अनुभूति (Self-Realization): महाशिवरात्रि की रात ध्यान और मंत्र जाप करने से मन शांत होता है और व्यक्ति को आत्म-ज्ञान की समझ होने लगती है, यानी उसे पता चलने लगता है कि वह क्या चाहता है, क्या सही है और क्या गलत।

महाशिवरात्रि पूजा विधि (maha Shivratri Puja Vidhi)

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करने से मनचाही मनोकामना पूरी (Wish Fulfillment) होती है। इसलिए हमने आपके लिए पूजा विधि को नीचे दिए गए कॉलम में Step-by-Step तरीके से समझाया है, ताकि आपकी पूजा में कोई कमी न रह जाए और आपको अपनी साधना (Worship) का पूरा फल मिल सके।

  1. प्रातःकाल की तैयारी और संकल्प: महाशिवरात्रि (Mahashivratri) के दिन ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurat) में उठकर स्नान करना बहुत लाभकारी माना जाता है। स्नान के बाद स्वच्छ, सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। फिर हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत और भगवान शिव की पूजा का संकल्प (Shiva Puja Resolution) श्रद्धा भाव से लें।
  2. शिवलिंग की शुद्धि और स्थापना: यदि आपके घर में शिवलिंग है तो उसे गंगाजल से स्नान करा के शुद्ध करें, और मंदिर में पूजा करते समय शांत मन से बैठकर पूजा में ध्यान लगाएँ। पूजा के लिए शिवलिंग को उत्तर(north) या पूर्व (east) दिशा में रखना शुभ माना जाता है।
  3. शिवलिंग अभिषेक की विधि: शिवलिंग पर पहले गंगाजल, फिर दूध, दही, शहद और घी चढ़ाएं और अंत में फिर से गंगाजल अर्पित करें। अभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें, इससे मनवांछित पूजा का फल मिलता है
  4. पूजन सामग्री का अर्पण और मंत्र जाप: अभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन का तिलक (Sandalwood Tilak) लगाएं और तीन पत्तियों वाला अखंड बेलपत्र (“Unbroken Bael Leaf”) अर्पित करें। इसके साथ धतूरा, भांग, अक्षत और फूल श्रद्धा पूर्वक चढ़ाएं तथा कम से कम 11, 21 या 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें, चाहें तो महामृत्युंजय मंत्र का भी पाठ कर सकते है
  5. आरती और रात्रि जागरण का महत्व: पूजा खत्म होने के बाद भगवान शिव की आरती करें। पूजा करते समय अनजाने में हुई गलती की क्षमा याचना (Apologize) करें और इस दिन रात के चार पहर की पूजा करना बहुत ही पुण्यकारी होती है, इसलिए रात्रि जागरण, भजन और मंत्र जाप करें, जिससे भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होगी।

अंत में : मेरा विचार (My Opinion)

दोस्तों, तो ये थीं महाशिवरात्रि के विषय में कुछ खास जानकारियाँ, जो मैंने आप सभी के साथ share कीं।
और अब समय है आपसे विदा लेने का, लेकिन उससे पहले मैं आपसे अपने मन की बात कहना चाहता हूँ। अगर आप महाशिवरात्रि पर्व पर सच में पुण्य कमाना (Spiritual Punya) चाहते हैं, तो इस दिन Possible हो तो मंदिर जाकर शिव जी की आराधना (Worship) और दान (Daan) करना बिल्कुल न भूलिएगा।

मेरा Personal Experience यही कहता है कि ऐसा करने से मन को असीम शांति तो मिलती ही है, और साथ में वह व्यक्ति शिव जी व माता पार्वती जी की कृपा का पात्र भी बन जाता है — और सच में असली शिव भक्त (True Shiv Bhakt) भी वही होता है।

लेकिन जो कुछ भी करें, सच्चे मन और श्रद्धा भाव (True Faith & Devotion) के साथ करें, क्योंकि बिना सच्ची श्रद्धा के किया गया पूजा-पाठ और दान-पुण्य व्यर्थ (waste) माना जाता है। कहा जाता है कि जो भी कार्य सच्चे मन से किया जाता है, उसी कार्य का शुभ फल (Shubh Phal) व्यक्ति को प्राप्त होता है।

आपका क्या मानना है? 🙏
आशा करता हूँ कि आपको यह ब्लॉग पसंद आया होगा। भोले भंडारी आप सभी की मनोकामनाएँ पूर्ण करें।
इसी के साथ मैं अपनी कलम को यहीं विराम देता हूँ, और फिर मिलते हैं एक और ज्ञानवर्धक व जानकारी से भरपूर ब्लॉग में।
धन्यवाद 🙏


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व्रत, पूजा अथवा किसी भी धार्मिक निर्णय से पूर्व पाठक अपनी सुविधा एवं आवश्यकता के अनुसार Drik Panchang, ठाकुर प्रसाद पंचांग जैसे अन्य प्रामाणिक पंचांगों से भी समय एवं तिथि की स्वयं जाँच अवश्य कर लें अथवा अपने स्थानीय मंदिर, विद्वान पंडित या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श करें। क्षेत्र, स्थान एवं स्थानीय परंपराओं के अनुसार तिथियों, मुहूर्तों एवं विधियों में अंतर संभव है। कैलेंडर में होने वाले किसी भी परिवर्तन, भिन्नता या संभावित त्रुटि के लिए हमारा ब्लॉग उत्तरदायी नहीं होगा।

महाशिवरात्रि व्रत से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: महाशिवरात्रि का व्रत क्यों रखा जाता है?

उत्तर: महाशिवरात्रि का व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने, पापों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए रखा जाता है।

प्रश्न: महाशिवरात्रि पर कितनी बार पूजा करनी चाहिए?

उत्तर: महाशिवरात्रि पर अगर संभव हो तो चार प्रहर में चार बार पूजा करें, अन्यथा एक बार विधि-विधान से पूजा और मंत्र जाप भी पर्याप्त होता है।

प्रश्न: बेलपत्र कितने चढ़ाने चाहिए?

उत्तर: आप 3, 5, 11 या 21 बेलपत्र चढ़ा सकते हैं। बस ध्यान रहे कि पत्तियां कटी-फटी या उनमे छेद न हो।

प्रश्न: क्या घर पर शिवलिंग की पूजा करना सही है?

उत्तर: हाँ, घर में रखे शिवलिंग का नियमित अभिषेक करना शुभ माना जाता है। महाशिवरात्रि पर विशेष अभिषेक करें और सामान्य दिनों में केवल जल अर्पित करना भी पर्याप्त होता है। ध्यान रखें कि घर का शिवलिंग अंगूठे के आकार से बड़ा न हो और पूजा नियमपूर्वक की जाए।

प्रश्न: साल 2026 में महाशिवरात्रि कब है?

उत्तर: वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा


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